बन रहे हैं अगर ये योग तो आप भी बन सकते हैं सफल पोलिटिशियन | Future Point

बन रहे हैं अगर ये योग तो आप भी बन सकते हैं सफल पोलिटिशियन

By: Future Point | 15-Dec-2017
Views : 10636बन रहे हैं अगर ये योग तो आप भी बन सकते हैं सफल पोलिटिशियन

होनहार बिरवान के होत चिकने पात’ अर्थात देश काल व परिस्थितियों से जन्म लेते हैं- जनप्रिय राजनीतिज्ञ राजनेता। राजनीति अगर व्यक्ति को सत्ता-सुख, लोकप्रियता, विशिष्ट सामाजिक पहचान और प्रभावशाली राजनीतिक पद की ओर ले जाती है, तो इसमें सेवा व मानव कल्याण के सर्वश्रेष्ठ भाव भी निहित हैं। इस तरह की असाधारण योग्यता सभी को नहीं मिल पाती है, इस बारे में हर संभव जानकारी व्यक्ति की जन्म कुंडली से लगाई जा सकती है। ऐसे कौन से योग है जो किसी व्यक्ति को एक सफल पोलिटिशियन बना सकते हैं -

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आईये जानें -

  • कुंडली का दसवां घर राजनीति का होता है। यदि किसी की कुंडली के अनुसार दशमेश भाव में उच्च का ग्रह हो तो वह राजनीति में सफल होता है। इसके अतिरिक्त राहू का संबंध छठे, सातवें, दशवें और ग्यारहवें घर से होने पर भी राजनीति में अच्छी सफलता मिलती है। सूर्य, शनि, मंगल और राहू राजनीति के आवश्यक कारक ग्रह हैं। इनमें राहू अगर नीति को प्रदर्शित करता है तो सूर्य साम्राज्य, वर्चस्व, तेज प्रभाव और उपाधि को दर्शाता है। इनके साथ मंगल का मेल उसे लोगों के हितार्थ नेतृत्व क्षमता को बढ़ाने वाला एवं शनि का साथ लोकहित में दृढ़ता कायम करने वाला होता है। इन दोनों के मेल होने से व्यक्ति में राजनेता के गुण आ जाते हैं। नौ ग्रहों में सूर्य को राजा माने जाने के कारण यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य प्रभावशाली स्थिति में है, तो वह उच्च पद पर आसीन हो जाता है, लेकिन राहू के प्रभाव का साथ मिलने पर ही उसमें नीतियों के निर्माण की क्षमता और उन्हें लागू कर पाने की योग्यता आती है। इन ग्रहों का प्रभाव नवांश और दशमाश कुंडली में होने से ऐसी स्थिति बनने के सिलसिले में कोई बाधा नहीं आती है।
  • कुंडली के लग्न में सिंह होने से जहां नेतृत्व क्षमता बढ़ती है, वहीं सूर्य, चंद्रमा, बुध और बृहस्पति के धनभाव में होने के साथ-साथ छठे भाव में मंगल, ग्यारहवें में शनि, बारहवें में राहू और छठे में केतु होने से व्यक्ति को राजनीति विरासत में मिलती है और ऐसा व्यक्ति लंबे समय तक राजनीतिज्ञ की भांति सक्रिय बने रहकर सत्ता-शासन में संलिप्त रहता है।
  • जिस किसी व्यक्ति की कुंडली के अनुसार लग्न वृश्चिक का हो तथा बारहवें में बृहस्पति की दृष्टि से शनि लाभ भाव में बैठा हो, राहु और चंद्रमा चैथे घर में रहे, शुक्र सप्तम में स्वराही बन जाए तथा सूर्य ग्यारहवें घर के स्वामी के साथ जा मिले, तो इस तरह की ग्रहीय स्थिति व्यक्ति को तेज प्रभाव वाला नेता बन देता है।
  • कुंडली में दसवां स्थान को कार्यक्षेत्र के लिए जाना जाता है। सरकारी नौकरी के योग को जानने के लिए इसी घर का विश्लेषण किया जाता है। दसवें स्थान में यदि सूर्य, मंगल या ब्रहस्पति की दृष्टि पड़ रही होती है तो सरकारी नौकरी का प्रबल योग बनता है। अपवादस्वरूप यह भी देखने में आता है कि जातक की कुंडली में दसवें स्थान में तो यह ग्रह होते हैं किंतु फिर भी जातक को नौकरी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा होता है तो ऐसे में अगर सूर्य, मंगल या गुरु पर किसी पाप ग्रह (अशुभ ग्रह) की दृष्टि पड़ रही होती है, तो जातक को सरकारी नौकरी प्राप्ति में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
  • कर्क लग्न में पैदा होने वाला अधिकतर व्यक्ति नेतृत्व गुणों से संपन्न होता है। भारत मे अधिकतर शासक इस लग्न या राशि के हैं। उनमें मुख्य हैं- पं. जवाहरलाल नेहरू, श्रीमती इंदिरा गांधी, इंद्र कुमार गुजराल, श्रीमती सोनिया गांधी, विश्वनाथ प्रताप सिंह, एच डी देवेगौड़ा, डा. मनमोहन सिंह आदि।
  • अधिकतर सफल राजनेताओं की कुंडली में राहु अन्य ग्रहों की तुलना में श्रेष्ठता लिए होती है। उनके छठे, सातवें, दसवें या ग्यारहवें भाव में राहु का प्रभाव राजयोग के लिए काफी असरकारी होता है।
  • ज्योतिष की राजनीतिक गणना के अनुसार सूर्य को अगर राजा तो चंद्रमा को राजमाता कहा गया है। यदि दसवें भाव में सूर्य उच्च का हो और उसके साथ छठे, सातवें, दसवें या ग्यारवें भाव में राहु का संबंध बने तो राजनीतिक सफलता सुनिश्चित है। ठीक उसी तरह चंद्रमा के लग्न या राशि में जन्म लेने वाले का संबंध राजनीति से जाता है।
  • वैसे तो प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली में राजयोग होता है। किसी में यह अल्प समय, यानि दो-तीन या पांच-छह सालों के लिए आता है, तो किसी के लिए यह ताउम्र बना रहता है। इस संदर्भ में भाग्य को दर्शाने वाला नवम् भाव भी काफी महत्वपूर्ण होता है। इसमें बना रहने वाला राजयोग जीवनभर प्रभावी बना रहता है।
  • कुंडली में नवम् भाव के ग्रह जब कर्म को दर्शाने वाले दसवें भाव के ग्रह के साथ आपस में मिल जाते हैं तब राजयोग बनता है। इन दोनों भावों के ग्रहों का संबंध जितना गहरा होता है, व्यक्ति को उतना अधिक राजयोग का लाभ मिलता है। किसी भी मंत्री, कुशल राजनेता या बड़ा राजनीतिक पद पर पहुंचने वाले को इस योग का स्वाभाविक लाभ मिलता है।

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